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kavita sagar: #new kavita 2
kavita sagar: #new kavita 2 : सुनहरे ख़्वाबों में कभी सुनहरे ख़्वाबों में कभी, लग जाती है रगीन दिये से आग लोग पालते हैं...
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kavita sagar: #new kavita 1 : सुरासुरी लोपित कर माँ असुर-सुर काँपा रहे आकाश व धरती, जगा तव वीणा-तार हे महासरस्वस्ती। निरंकुश व...
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kavita sagar: #new kavita 2 : सुनहरे ख़्वाबों में कभी सुनहरे ख़्वाबों में कभी, लग जाती है रगीन दिये से आग लोग पालते हैं...
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क्या हालात आज के किसको खबर नहीं, अकड़े हैं बर्फ-से कोई रबर नहीं। जल रहे जमीं पे ख्वाइशों के ढेर, चोटी पे बैठे को आत...
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