Monday, January 20, 2020

kavita sagar: #new kavita 2

kavita sagar: #new kavita 2:   सुनहरे ख़्वाबों  में  कभी  सुनहरे ख़्वाबों में कभी, लग जाती है रगीन दिये  से  आग  लोग पालते  हैं  बुझा देने का हौसला  ...

kavita sagar: #new kavita 2

kavita sagar: #new kavita 2:   सुनहरे ख़्वाबों  में  कभी  सुनहरे ख़्वाबों में कभी, लग जाती है रगीन दिये  से  आग  लोग पालते  हैं  बुझा देने का हौसला  ...

kavita sagar: #new kavita 1

kavita sagar: #new kavita 1: सुरासुरी लोपित  कर माँ   असुर-सुर  काँपा रहे  आकाश  व धरती, जगा तव  वीणा-तार  हे महासरस्वस्ती। निरंकुश वे  दे  रहे  तान आसुरी  क...

Saturday, January 11, 2020

kya halat aaj ke 1

क्या   हालात  आज  के किसको  खबर नहीं, 
अकड़े  हैं  बर्फ-से  कोई  रबर  नहीं।

जल  रहे  जमीं  पे  ख्वाइशों  के  ढेर,
चोटी  पे  बैठे  को  आतिश  नहीं।
चीखती  है बेटियाँ  अधेर  रात-गुफा मे,  
मैखाने  के नशेड़ियों  में  कोई  गदर नहीं।

लाशों  पे  रक्स  गीध का  देखते  निजाम,
फर्ज  पे  मरनेवालों  की  कोई  कदर नहीं।

मायूस सी पड़ी हैं चटानों पे शबनम,
चाहे वो उठ जाना उसे और सबर नहीं। 

तेरे दिन हुए पुरे ओ  जालिम  सितमगर,
हाथी भी चीटियों  के खौफ से जबर नहीं।

नियत ही चोट में है निकले  क्या  बहर से,
वो जहर ही आया  कोई  अमर  नहीं





kavita sagar: #new kavita 2

kavita sagar: #new kavita 2 :   सुनहरे ख़्वाबों  में  कभी  सुनहरे ख़्वाबों में कभी, लग जाती है रगीन दिये  से  आग  लोग पालते  हैं...