Monday, January 20, 2020

kavita sagar: #new kavita 1

kavita sagar: #new kavita 1: सुरासुरी लोपित  कर माँ   असुर-सुर  काँपा रहे  आकाश  व धरती, जगा तव  वीणा-तार  हे महासरस्वस्ती। निरंकुश वे  दे  रहे  तान आसुरी  क...

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kavita sagar: #new kavita 2

kavita sagar: #new kavita 2 :   सुनहरे ख़्वाबों  में  कभी  सुनहरे ख़्वाबों में कभी, लग जाती है रगीन दिये  से  आग  लोग पालते  हैं...